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एक और उपन्यास एक और उपन्यास एक और उपन्यास 😭
फिर रात को सपने में उन सारे उपन्यास के पात्र मेरे सपने में आते है !
कोई रोता हैं, कोई सेक्स सुक्स की बाते करते रहते है , कोई बिलकुल कंकाल की तरह दिखाई देता है और मरने के कगार पे होता है । जहा कोई विलेन नही है लेकिन वो समाज में रहने वाले चार लोग जाति ,धर्म वाली बातें ! फिर वो भुखमरी वाली हालत में चारो ओर लोग बच्चे तड़प रहे है । कोई किसी को पीट रहा होता है । Specially सूरज का सातवा घोड़ा की पात्र जो की जन्म से अपंग थी वो गलियां बक रही है और मुझे ऐसा लगता है जैसे में उसको मार डालू
एक दूसरे के नजदीक बोहोत नजदीक होते है लेकिन इसके आगे कुछ नहीं करते । वासना पवित्रता त्याग प्रेम समर्पण की ma ka 😔
यहां तक कि कभी भी उन सब के चेहरे मुझे याद नही रहते । क्या पागल हो जाऊंगी में?
एक दिन तो ये सपना आया की कुछ लोग ट्रक लेकर आते है चोरी करने और में उनको देख लेती हू और फिर वो मेरे पीछे पड़े हैं और मैं भाग रही हु भाग रही हु भाग रही हु ! फिर अचानक रविशंकर महाराज आते है और उन लोगो से बचाते है 🤣 ( kyuki mene tab unke bare mein kuch jyada hi pdh liya tha toh wo sapne mein hi aa gye )
this dude -> 😔 <- he gets me
Ab classmates milte hai to ignore karte hai
Baat aesi kro ki char log baat hi Krna chor de